संस्कृत -जर्मन विवाद को छोड़िये यह फ़ोटो मेरे अपने गाँव की संस्कृत पाठशाला की है। यहाँ कभी प्राथमिक शिक्षा संस्कृत माध्यम में ही दी जाती थी जिसके बूते आज भी मेरे पापा (जो खुद वहीँ के पढ़े हैं)कहते हैं क़ि रामपुर का कुत्ता भी संस्कृत बोलता है।
आज यह पाठशाला खंडहर है। छात्र आज एक भी नहीं हैं पिछले दरवाजे से नियुक्त कुछ अध्यापक हैं जिन्हें संस्कृत का ज्ञान बिलकुल भी नहीं है । ऐसी न जाने कितनी पाठशालाओं के पुनर्जीवन की भी सोची जा सकती है।
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